Breaking: मोरी विकासखंड के जखोल इंटर कॉलेज की बदहाली, जर्जर भवन में पढ़ाई को मजबूर दर्जनों गांव के छात्र
सरकार ने आवंटित किया धन, लेकिन वर्षों से अधूरे व घटिया निर्माण कार्य ने बढ़ाई परेशानी

मोरी (उत्तरकाशी): उत्तरकाशी जनपद के मोरी विकासखंड की पंचगांई पट्टी के लगभग 20 से 22 गाँवों के छात्रों के लिए बना इकलौता इंटर कॉलेज इस समय बदहाल स्थिति में है। विद्यालय का पुराना भवन जर्जर हो चुका था, जिसके चलते सरकार ने वर्ष 2020 में नए भवन निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की थी। लेकिन वर्षों से अधूरे निर्माण कार्य में हुई लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण नया भवन तैयार होने से पहले ही पूरी तरह असुरक्षित हो गया है।
विद्यालय के नवनिर्मित भवन निर्माण कार्य में पहले ही दरारें आ गई हैं, स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण इस विद्यालय के छात्र सुविधाओं से वंचित हैं। क्षेत्र के अधिकांश गरीब परिवार अपने बच्चों को कहीं और पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है।
निर्माण कार्य में भारी अनियमितता, ठेकेदारों द्वारा किया गया घटिया निर्माण कार्य।
सरकार द्वारा विद्यालय के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य में जिस तरह की लापरवाही बरती गई, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष सुरेंद्र रावत ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा—
“निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। नवनिर्मित भवन के कॉलम्स में पहले ही दरारें पड़ चुकी हैं। इसके अलावा, जो कक्षाएं बनाई गई हैं, वे बहुत छोटी हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई में कठिनाई होगी। ऐसा लगता है जैसे ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार के पैसे का दुरुपयोग किया है।”
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी इस पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विद्यालय का नया भवन भी सुरक्षित नहीं है और न ही इसमें छात्रों के लिए पर्याप्त जगह है।
छात्रों का भविष्य खतरे में, मजबूरन कर रहे पलायन
इस स्थिति से परेशान होकर कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को दूसरे शहरों के स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया है। लेकिन यह विकल्प हर किसी के लिए संभव नहीं है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के लोग किसान या मजदूर हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं कि वे अपने बच्चों को दूर पढ़ने भेज सकें।
स्थानीय अभिभावकों का कहना है—
“हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, लेकिन जब स्कूल की स्थिति ही ठीक नहीं होगी, तो वे कैसे पढ़ेंगे? मजबूर होकर हमें अपने बच्चों को दूर भेजना पड़ रहा है, लेकिन हर किसी के पास यह विकल्प नहीं है। गरीब किसान और मजदूरों के बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित रह रहे हैं।”
वर्षों से शिक्षा विभाग और विधायक की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोग और विद्यालय प्रबंधन लगातार इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि क्षेत्रीय विधायक ने भी कोई संज्ञान नहीं लिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यह विद्यालय शहर में होता, तो सरकार और प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता, लेकिन चूंकि यह एक दूरस्थ क्षेत्र में है, इसलिए इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग—जांच और पुनर्निर्माण
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने सरकार से मांग की है कि—
1. निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
2. विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण किया जाए, जिससे छात्रों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने का अवसर मिले।
3. शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
क्या सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी?
उत्तरकाशी का यह विद्यालय न केवल एक संस्थान है, बल्कि 20 से अधिक गाँवों के छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है। यदि सरकार और प्रशासन जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं देते, तो यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के विकास पर असर डालेगी।
अब देखना यह होगा कि क्या शिक्षा विभाग और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर यह मामला भी अन्य सरकारी अनियमितताओं की तरह दबकर रह जाएगा?