
स्यालब, उत्तरकाशी। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई, राजेंद्र सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय, बड़कोट द्वारा ग्राम सभा स्यालब में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन “लोक संस्कृति एवं लोक कला संरक्षण दिवस” धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक केदार सिंह रावत एवं विशिष्ट अतिथि प्रकाश असवाल (पूर्व जेष्ठ प्रमुख) सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ हुआ। वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता रावत ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि गढ़वाल और रवाईं की लोक संस्कृति एवं लोक कला हमारी पहचान हैं, और इसे संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है।
मुख्य अतिथि केदार सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा, “लोक संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की अमूल्य पूंजी है। हमें इसे बचाने और बढ़ाने का संकल्प लेना होगा।”
विशिष्ट अतिथि प्रकाश असवाल ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि लोक संस्कृति और लोक कला समाज की आत्मा हैं, और इनका संरक्षण युवाओं की जिम्मेदारी है।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें शामिल थे:
प्रवीन असवाल (अध्यक्ष, कालिंदी मंडल), भगवान सिंह पंवार (पूर्व प्रधान, ग्राम सभा स्यालब), मनमोहन सिंह चौहान, प्रवीण राणा, जयप्रकाश रावत, उपेंद्र सिंह रावत, रविंद्र सिंह पंवार, रणवीर सिंह रावत, जगमोहन सिंह रावत, लोक साहित्यकार ध्यान सिंह रावत “ध्यानी” ने लोक संस्कृति एवं साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, और हमें इन्हें संजोकर रखना होगा।
लोक संस्कृति संरक्षण पर विशेष प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने लोकगीत, लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पहाड़ी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। प्रतिभागियों ने लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों के संरक्षण का संदेश दिया।
मंच संचालन एवं समापन कार्यक्रम का कुशल संचालन कार्यक्रम अधिकारी डी. पी. गैरोला द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए लोक संस्कृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।” कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं स्थानीय नागरिकों ने लोक संस्कृति एवं विरासत को संजोने का संकल्प लिया, ताकि यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।